Shri Pitar Chalisa PDF |श्री पितर चालीसा

Pitar Chalisa PDF
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॥ दोहा ॥

हे पितरेश्वर आपको,
दे दियो आशीर्वाद ।
चरणाशीश नवा दियो,
रखदो सिर पर हाथ ।
सबसे पहले गणपत,
पाछे घर का देव मनावा जी ।
हे पितरेश्वर दया राखियो,
करियो मन की चाया जी ॥
॥ चौपाई ॥
पितरेश्वर करो मार्ग उजागर । चरण रज की मुक्ति सागर ॥1॥
परम उपकार पित्तरेश्वर कीन्हा । मनुष्य योणि में जन्म दीन्हा ॥2॥
मातृ-पितृ देव मनजो भावे । सोई अमित जीवन फल पावे ॥3॥
जय-जय-जय पित्तर जी साईं । पितृ ऋण बिन मुक्ति नाहिं ॥4॥
चारों ओर प्रताप तुम्हारा । संकट में तेरा ही सहारा ॥5॥
नारायण आधार सृष्टि का । पित्तरजी अंश उसी दृष्टि का ॥6॥
प्रथम पूजन प्रभु आज्ञा सुनाते । भाग्य द्वार आप ही खुलवाते ॥7॥
झुंझुनू में दरबार है साजे । सब देवों संग आप विराजे ॥8॥
प्रसन्न होय मनवांछित फल दीन्हा । कुपित होय बुद्धि हर लीन्हा ॥9॥
पित्तर महिमा सबसे न्यारी । जिसका गुणगावे नर नारी ॥10॥
तीन मण्ड में आप बिराजे । बसु रुद्र आदित्य में साजे ॥11॥
नाथ सकल संपदा तुम्हारी । मैं सेवक समेत सुत नारी ॥12॥
छप्पन भोग नहीं हैं भाते । शुद्ध जल से ही तृप्त हो जाते ॥13॥
तुम्हारे भजन परम हितकारी । छोटे बड़े सभी अधिकारी ॥14॥
भानु उदय संग आप पुजावै । पांच अँजुलि जल रिझावे ॥15॥
ध्वज पताका मण्ड पे है साजे । अखण्ड ज्योति में आप विराजे ॥16॥
सदियों पुरानी ज्योति तुम्हारी । धन्य हुई जन्म भूमि हमारी ॥17॥
शहीद हमारे यहाँ पुजाते । मातृ भक्ति संदेश सुनाते ॥18॥
जगत पित्तरो सिद्धान्त हमारा । धर्म जाति का नहीं है नारा ॥19॥
हिन्दु, मुस्लिम, सिख, ईसाई । सब पूजे पित्तर भाई ॥20॥
हिन्दु वंश वृक्ष है हमारा । जान से ज्यादा हमको प्यारा ॥21॥
गंगा ये मरुप्रदेश की । पितृ तर्पण अनिवार्य परिवेश की ॥22॥
बन्धु छोड़ना इनके चरणाँ । इन्हीं की कृपा से मिले प्रभु शरणा ॥23॥
चौदस को जागरण करवाते । अमावस को हम धोक लगाते ॥24॥
जात जडूला सभी मनाते । नान्दीमुख श्राद्ध सभी करवाते ॥25॥
धन्य जन्म भूमि का वो फूल है । जिसे पितृ मण्डल की मिली धूल है ॥26॥
श्री पित्तर जी भक्त हितकारी । सुन लीजे प्रभु अरज हमारी ॥27॥
निशदिन ध्यान धरे जो कोई । ता सम भक्त और नहीं कोई ॥28॥

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तुम अनाथ के नाथ सहाई । दीनन के हो तुम सदा सहाई ॥29॥
चारिक वेद प्रभु के साखी । तुम भक्तन की लज्जा राखी ॥30॥
नाम तुम्हारो लेत जो कोई । ता सम धन्य और नहीं कोई ॥31॥
जो तुम्हारे नित पाँव पलोटत । नवों सिद्धि चरणा में लोटत ॥32॥

सिद्धि तुम्हारी सब मंगलकारी । जो तुम पे जावे बलिहारी ॥33॥
जो तुम्हारे चरणा चित्त लावे । ताकी मुक्ति अवसी हो जावे ॥34॥
सत्य भजन तुम्हारो जो गावे । सो निश्चय चारों फल पावे ॥35॥
तुमहिं देव कुलदेव हमारे । तुम्हीं गुरुदेव प्राण से प्यारे ॥36॥

सत्य आस मन में जो होई । मनवांछित फल पावें सोई ॥37॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई । शेष सहस्र मुख सके न गाई ॥38॥
मैं अतिदीन मलीन दुखारी । करहु कौन विधि विनय तुम्हारी ॥39॥
अब  पित्तर जी दया दीन पर कीजै । अपनी भक्ति शक्ति कछु दीजै ॥40॥

दोहा

पित्तरौं को स्थान दो,

तीरथ और स्वयं ग्राम ।
श्रद्धा सुमन चढ़ें वहां,

पूरण हो सब काम ॥
झुंझुनू धाम विराजे हैं,

 पित्तर हमारे महान ।
दर्शन से जीवन सफल हो,

 पूजे सकल जहान ॥
जीवन सफल जो चाहिए,

 चले झुंझुनू धाम ।
पित्तर चरण की धूल ले,

 हो जीवन सफल महान ॥

॥ इति श्री पितर चालीसा संपूर्णम् ॥

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